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14 Jan 2017 · 1 min read

अब भाभी अलग चूल्हा जलाती है

न बच्चे शोर करते हैँ न मम्मी मुस्कुराती है

मै जब वर्दी मेँ होता हूँ तो दादी सिर झुकाती है

यही घर था जहाँ हरपल खुशी के फूल खिलते थे

यही घर है कि अब भाभी अलग चूल्हा जलाती है

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