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13 Jan 2017 · 1 min read

ख़ामोशी

खामोशी जब-
जुबां से उतर कर,
निगाहों में आ जाती है,
तो मुस्कराहट होठों होती,
लेकिन निगाहें तो, अंदर की बात-
बोलती-सी होती ,
आज फिर-तेरी नजरें-
मुझे परेशान कर रही हैं,

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