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11 Jan 2017 · 1 min read

*** शायद इंसानियत कहीं खो गयी है **

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बस्तियां दिल की वीरां हो गयी है

प्यार की दुनियां कहीँ खो गयी है

आ जाओ बसेरा कर लो इसमें अपना

शायद इंसानियत फिर से कहीं सो गयी है ।।

?मधुप बैरागी

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