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11 Jan 2017 · 1 min read

दिल से उपजाऊ नहीं, ..कोई और जमीन

दिल के जैसा आज तक, नजर न आया खेत !
कुछ भी बो कर देख लो, मिलता सूद समेत !!

जब जब बोऊँ गम यहाँ,हो जाऊं ग़मगीन !
दिल से उपजाऊ नहीं, ..कोई और जमीन !!
रमेश शर्मा

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