Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
11 Jan 2017 · 1 min read

एक बेटी की अपनी माँ से अपेक्षा

मेरी एक अपेक्षा
मेरी माँ से
कि माँ क्यूँ
तू मुझे अपना बेटा नहीं समझती,
क्योंकि देखा है
तेरी आँखों में मैंने
एक बड़े बेटे की कमी को,
पढ़ा है तेरे मन को,
जो कहता है कि
काश मेरा एक बड़ा बेटा होता,
मैं जानती हूँ माँ,
तू मुझसे बहुत प्यार करती है
पर माँ एक बार तो
देख मेरी तरफ
मैंने हमेशा तेरा
बड़ा बेटा बनने की
पूरी कोशिश की है माँ
अपनी बहनो के प्रति
हर दायित्व को निभाया है
एक बड़े भाई की तरह |
जब भी आवाज लगाई तूने
तुरंत तेरे पास अकेले ही
दौड़ी चली आई माँ
बिना जमाने की फिकर किए
कि इस दुनिया में
कुछ लोग ऐसे भी हैं
जो एक अकेली लड़की को
बहुत बुरी निगाहों से देखते हैं,
पर माँ, मैं फिर भी
तेरे एक बार बुलाने पर ही
तुरंत घर भागी चली आती हूँ,
क्योंकि मैं तेरा
बेटा बनना चाहती हूँ माँ,
तेरा वो बेटा मेरी माँ
जो तू मेरी जगह चाहती थी ||

प्रतीक्षा साहू

Loading...