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10 Jan 2017 · 1 min read

नोट की महिमा .....

नोट की महिमा

जिन नोटन की बात करत हैं,उसकी महिमा अपरंपार
नोन-तेल,वा राशन-पानी, खरीद फरोख्त ये अधार

बड़का नोट तिजौरी शोभा,छुटका लिपट रहे अखबार
सूना-सूना सब नेग भयो,दुआर – चार टीका बिसार

ननद न पूछे भौजाई को,देवर नखरे भुलय हजार
उतरे रिश्ते पालिश सारे,समय चाबुक पड़ी है मार

काले नोट तिजौरी रख लो ,सफेद धर दो जग बगराय
इसी सोच के लोगन ही ,घूमे-फिरते मुह लटकाय

बिना नोट के रोवन लागे ,सकल बानिया-सेठ बजार
बिना नोट के कौन उतारे, तूफानी नदिया के पार

फील करते मरियल बइल सा ,क्लर्क-अफसर नव-अवतार
खुशबू नोट जरा सूंघा दो ,सरपट चले तेज रफ्तार

दाम, बढ़ती मंहगाई से,फर्क न लागे धुंआधार
जिनके घर धन-काला साथी,मिलता हो अकूत भंडार

नोट से सभी काम जुड़े हैं ,चाहे कि पेंटर हो सुनार
जनता नारों फिर गूँज सुने,मोहक-मनभावन सरकार

सुशील यादव
28,11,16

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