Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
10 Jan 2017 · 1 min read

बेटियाँ

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह,
पनपती आधार हैं।
बेटियाँ ही अनवरत,
प्रकृति की सृजनहार हैं।

किसी भी संदेह में ना,
उन्हें मारा जाय।
उनको भी स्नेह की,
छाँव में दुलारा जाय।

इनसे ही श्रृगार धरा का,
इनसे ही भूमि पावन।
जगत जननी अयुज बेटियाँ,
इन्हें करें सौ बार नमन।

समानता को संकल्प बना,
आगे इनको बढ़ाया जाय।
भूल रूढ़ियाँ सभी चलो,
हर बेटी को पढ़ाया जाय।

Loading...