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8 Jan 2017 · 1 min read

" ---------------------- अलसाई सी धूप "

रात दिवस ठंडे लगते, शीतलता चहुँ ओर !
गरम गरम की चाहना, मदमाती सी भोर !!

निखरी निखरी है छटा, निखरा निखरा रूप !
अलसाया सूरज लगे, अलसाई सी धूप !!

चढ़ी कपकपी बदन पर, सरदी है खुशहाल !
मक्के की रोटियां कहीं, सजता हलवा थाल !!

बदन कसरती चाहिये, मौसम है अनुकूल !
खाया पीया अंग लगे, रोग चटायें धूल !!

पढ़ने में चित मन लगे, लगती प्यारी नींद !
आँखों में सपने सजे, वक्त दिखाये सींग !!

बिछी बर्फ की चादर है, काँप रहा बुढ़ापा !
जोशे जवानी मस्त है, मस्ती राग अलापा !!

बृज व्यास

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