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8 Jan 2017 · 1 min read

प्यार जबसे मिला खिल कमल हो गए

प्यार जबसे मिला खिल कमल हो गए
नैन तुमसे मिले फिर सज़ल हो गए

चुप रहे हम कहा कुछ नहीं था कभी
पर अधर बावरे ये विकल हो गए

प्यास कैसे बुझेगी बताओ हमें
स्त्रोत जल के सभी जब गरल हो गए

तुमको पाकर हमें आज ऐसा लगा
कर्म जैसे हमारे सफल हो गए

साथ रहकर तुम्हारे सजन आज तो
झोपड़ी भी हमें अब महल हो गए

थे अधूरे बहुत हम तुम्हारे बिना
तुम मिले ‘अर्चना’ हम ग़ज़ल हो गए
डॉ अर्चना

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