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7 Jan 2017 · 1 min read

*मेरी रूह को मत आज़ाद कर*

मेरी रूह को मत आज़ाद कर
तेरे आंचल में रख यूं छुपाकर
शीत हवाओं का कहर ना छू सके
कम से कम ऐसा एक पहर कर।।
?मधुप बैरागी

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