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5 Jan 2017 · 1 min read

*** बेटियाँ ***

*** बेटियाँ ***

लड़की का जन्म होता है
सन्नाटा छा गया , ख़त्म धन-दौलत

ना चेहरे पे मुस्कुराहट
क्या-क्या सोचते पूर्वाभास

असहनीय पीड़ा को
रखा उदर , नॊ मास

हर क्षेत्र में आगे बेटियाँ
तोड़ती समाज की बेड़ियाँ

शिक्षा दो , अधिकार दो
संसार को गतिमान कर दो

बेटियाँ ही सुख-समृद्धि है
बेटियाँ ही श्री,लक्ष्मी है

– राजू गजभिये
दर्शना मार्गदर्शन केंद्र , बदनावर जिला धार ( मध्य प्रदेश )

– प्रणाम पत्र –

प्रमाणित किया जाता है की , ” बेटियाँ ” कविता मेरी स्वरचित एव मौलिक रचना
है | नियमानुसार ५० शब्दो की है | प्रतियोगिता के सभी नियम मान्य है |
– राजू गजभिये
दर्शना मार्गदर्शन केंद्र , बदनावर जिला धार ( मध्य प्रदेश )

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