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30 Dec 2016 · 1 min read

उतरी जो मस्तिष्क में (दोहे)

उतरी जो मस्तिष्क में,… यादों की बारात !
आये झटपट हाथ में, कागज़ कलम दवात !!

जात-पात मे भेद कर, खुद को कहें शरीफ !
सुनकर ऐसी बात ही,….होती है तकलीफ! !

वक्त-वक्त का फेर है,करे वक्त भी घात !
वरना चूहा भी कभी,.. करे शेर से बात !!
रमेश शर्मा

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