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28 Dec 2016 · 1 min read

नर्म धुप

मुक्तक

नर्म धूप गर्म हुई
कपड़ों में शर्म हुई
समय का भरोसा क्या
इल्लत ही कर्म हुई
@डा०रघुनाथ मिश्र ‘सहज’
अधिवक्ता /साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित

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