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26 Dec 2016 · 1 min read

जब हम मुस्कुराने लगे

आज जब हम यूं ही गुनगुनाने लगे ।
बहारें भी साथ साथ मुस्कुराने लगे ।
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विहंग का कलरव मन मोहित करता
उसके स्वर मधुर संगीत बनाने लगे।
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गुल खिल रहे देखो गुलशन गुलशन
गुंजन कर रहे भ्रमर,गीत सुनाने लगे।
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पंख फैलाये ये रंग बिरंगी तितलियाँ
मिलकर फूल से, खिलखिलाने लगे।
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रश्मियां बिखेर रहे धरा पर भास्कर
प्रकाश से तम को देखो भगाने लगे।
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खिलखिलाती नजर आती है दुनियां
हँसते रहो तो वो साथ निभाने लगे।
*
खुद से हंसते रहो “पूनम” दुखी मन
से तो हंसता हुआ जग भी रुलाने लगे।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान
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