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18 Dec 2016 · 1 min read

??प्रीत मन से मन की??

अनुराग झरे नयन से,पुष्प हँसें तेरे लब पर। चन्द्रमुख से है उजाला, मेरे जीवन-शब पर।।

हम मिले,मिलकर चले, प्रेम पथ पर प्रिया!
नाम चमका इश्क़ में यूँ,ज्यों चाँद नभ पर।।

तोड़कर रीतियाँ,हमने बनाई हैं प्रीत-नीतियाँ।
देता है दुवाएं ये ज़माना,इस प्यार ग़ज़ब पर।।

लैला-मंजनू,हीर-रांझा,शीरी-फ़रहाद की तरह।
हम चाहे एक-दूसरे को,प्यार दिल में मथकर।।

फूल-ख़ुशबू से मिले,इश्क़े-आतिश में हैं जले।
कसमें-वादे नेक कर,खड़े हम प्रेम-सरहद पर।।

प्रीत”प्रीतम”की अनूठी,हर्षाए,मनभाए जन-2।
इंद्रधनुष निकला हो ज्यों गगन में सजधज कर।।

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