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16 Dec 2016 · 1 min read

कहने को तेईस हैं,.दोहों के प्रारूप !

कहने को तेईस हैं,……दोहों के प्रारूप !
करे भावना व्यक्त हर, कवि.अपने अनुरूप !!

क्या मिलना उस शख्स से,मिल के आए लाज !
बजता हरदम बेसुरा ,….. फूटा जैसे साज !!

नारी की करता नहीं इज्जत जहाँ समाज !
वहाँ सफल होती नहीं, पूजा और नमाज !!

रमेश शर्मा.

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