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14 Dec 2016 · 1 min read

इंसा तो इसां है खुदा कब है

इंसा तो इंसा है खुदा कब है
मौत से खुद की बचा कब है
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तख्तो ताज शहंशाह न रहे
अब यहां कोई रुका कब है
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जिंदगी है की छोड़ जाती है
इसका कोई भी सगा कब है
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जिंदगी से शिकायत सबको
मौत से कोई भी गिला कब है
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मौत तो जिंदगी का साया है
हरेक पल मे वो जुदा कब है
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कपिल कुमार
14/12/2016

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