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11 Dec 2016 · 1 min read

जानो मुझको बस इंसान

सच हो सपनों की मुस्कान
पंखों को मेरे मिले उड़ान
व चाहूँ मैं अतिशय ध्यान
जानो मुझको बस इंसान|

दिवस विशेष का देकर दान
क्यों करते मन मेरा म्लान
चाहूँ इतना भर सम्मान
जानो मुझको बस इंसान|

देवीतुल्या न मुझको जान
वहन कठिन,यह लेता प्राण
समझी यह षण्यन्त्र महान
जानो मुझको बस इंसान|

भ्रम में हैं सब जन अंजान
नारी लो तुम मन में ठान
न बनो पशु,न देवी महान
जानो खुद को बस इंसान|

✍लेखिका हेमा तिवारी भट्ट✍

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