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11 Dec 2016 · 1 min read

रब की मुझपर मेहर हो गई

रब की मुझपर मेहर हो गई
जिंदगी मेरी बेहतर हो गई

उन्हें देखते रहे भर नजर
शब हुई और सहर हो गई

आ गई वो सँवरकर यहाँ
उन्हीं की तरफ नजर हो गई

जान मेरी चली जाएगी
बेवफा वो अगर हो गई

याद तेरी है दिल में बसी
क्या करें तू बेखबर हो गई

भूल न पाए तुम्हें अब कँवल
जिंदगी तेरी ही नज़र(भेंट) हो गई

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