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11 Dec 2016 · 1 min read

चलो आज ये बात भी आर-पार हो जाये

चलो आज ये बात भी आर-पार हो जाये
दुश्मन दुश्मन ही रहे यार -यार हो जाये

ये जो उछालते हो गिरा- गिरा के उठाते हो
कहीं ऐसा न हो की दिल ज़ार-ज़ार हो जाये

नज़र नज़र से मिलती इस क़दर कि दरमियाँ
अगरचे हो परदा भी तार-तार हो जाये

हरगिज़ ना कहिए हाय महफ़िल में ऐसी बात
निकली जो ज़बान से तो खार-खार हो जाये

जो धड़का गया हाय दिल को धमाके जैसा
वही हादसा क्यूँ ना बार- बार हो जाये

देखूं कहाँ कहाँ से और क्या- क्या देखूं
मिरी उनसे जब नज़रें चार-चार हो जाये

माना जीतने का मज़ा ही कुछ और है’सरु’
गले पड़कर खूबसूरत हार- हार हो जाये

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