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10 Dec 2016 · 1 min read

नारी तेरी व्यथा अनमोल

सुरक्षित नहीं थी इस जहां में
हो गई माँ की कोख असुरक्षित ||

छीप ही गया है बचपन तेरा
खनखनाहट भी खो गयी हैं तेरी ||

लुट जाती सरेआम है अस्मत
भाई रावण सा यहां नहीं कोई है ||

ब्याह के जाती ससुराल को तुम
झोंक दी जाती अग्नि में ज़िंदा ||

है पराकाष्ठा सहनशक्ति की तेरी
ममता हुई ना कींजित विचलित ||

प्यार का गहरा सागर बसा है
दिल में अथाह दर्द भरा हैं ||

नवजीवन को देने वाली
हर रंग में तु ढलने वाली ||

नारी तेरी व्यथा अनमोल
नारी तेरी व्यथा अनमोल ||

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