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10 Dec 2016 · 1 min read

तुम गर साथ होती............

वो तन्हाई के लम्हे,
वो बेखुदी की राते,
यु न गुजरती,

तुम गर साथ होती……….

हम तुमको बहो में रखते,
तुम्हारे प्यार को’
आँखों के फलक से’
दिल की जमी पर बरसते,

तुम गर साथ होती………..

वो शाम अश्को में न नहाती,
तुम्हारी हर ख्वाइश पूरी होती,
मैं आँखों से आँखे मिलाता,
तुम ख़ुशी से पागल हो जाती,
ये सब हकीक़त होता ‘साहिब’

तुम गर साथ होती…………

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