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9 Dec 2016 · 1 min read

अंगार वीर ने उगले है

अंगार वीर ने उगले है , कुछ ऐसा तुम श्रृंगार करो ।
रण में जो घाव मिले मुझको , चुम्बन से तुम उपचार करो ।
जाना जल्दी फिर समरभूमि , सजनी उत्साह भरो अंदर ,
रोम रोम की पीड़ा हर लो , मुझ पर इतना उपकार करो ।

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