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8 Dec 2016 · 1 min read

" जुबां दिल की ....."

” जुबां दिल की …..”

जुबां दिल की इतनी है जटिल ,
कि उसे समझना है मुश्किल।

है “दिल” जुबां गर समझ जाता ,
एक दिल है मुस्कुराता ,
तो वहीं दूसरा है आँसू बहाता।

डगर यह मुश्किल है होता ,
कोई भूल भुलैया में खो जाता ,
तो कोई जिगर बन जाता।

मुश्किल से जटिल की जटिलता
को है कोई समझ पाता।
जो दिल जुबां को समझ जाता ,
वही जटिलता पर फतह पाता।

जुबां दिल की इतनी है जटिल ,
कि उसे समझना है मुश्किल ।

@पूनम झा । कोटा ,राजस्थान

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