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7 Dec 2016 · 1 min read

देखकर शोहरत मेरी

देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो
था अभी तक साथ मेरे
क्यूँ अकेला चल रहा है वो

हर रोज कहता था वो
दर्द दिल के सुनाता था
भावना के आंचल में बैठा
रोज आंसू बहाता था
पर आज दूर से ही
क्यूँ हस रहा है वो
देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो

मेरी खामोशी नहीं पर
बेबाक सा दिल जानता है
दीपक तले है अंधेरा घना
यह उसे पहचानता है
फिर है उदासी को छुपाये
क्यूँ बड़ रहा है वो
देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो

-सोनिका मिश्रा

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