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7 Dec 2016 · 1 min read

ग़ज़ल

कमजोर जो हैं तुम उन्हें बिलकुल सताया ना करो
खेलो हँसो तुम तो किसी को भी रुलाया ना करो |

दो चार दिन यह जिंदगी है मौज मस्ती से रहो
वधु भी किसी की बेटी है उसको जलाया ना करो |

चाहत की ज्वाला प्रेम है इस ज्योत को जलने ही दो
लौ उठना दीपक का सगुन उसको बुझाया ना करो |

अच्छी लगी हर बात जब बोली मधुर वाणी सदा
कड़वी नहीं अच्छी कभी, कड़वी बताया ना करो |

हम मान लेते हैं सभी बातें तुम्हारी किन्तु तुम
आगे अभी ज्यादा कभी मुझको नचाया ना करो |

© कालीपद ‘प्रसाद’

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