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6 Dec 2016 · 1 min read

वक्त यहीं पर अभी इसको ठहर जाने दे

वक्त यहीं पर अभी इसको ठहर जाने दे
तेरे दीदार से नज़रों को गुज़र जाने दे

नश्शा हो जाये मुझे मौत मेरी होने तक
अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे

शमअ उलफत की जलाई है उजाला होगा
शाम ये आई अगर है तो गुज़र जाने दे

एक मुद्दत से मोहब्बत की तिरी दासी हूँ
जा तुझे क्या मुझे यूँ ही बिखर जाने दे

तुम पे ये जान भी दे दूँ क्या ग़म है मुझे
प्यार में कँवल को हद से गुज़र जाने

बबीता अग्रवाल #कँवल

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