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5 Dec 2016 · 1 min read

मेरे बाद

_कविता _
मेरे बाद

*अनिल शूर आज़ाद

जब मैं
इस दुनिया में
नहीं रहूंगा
कुछ ख़ास/ नही बदलेगा
बल्कि/कुछ नही बदलेगा
ऐसी ही रहेगी
यह दुनिया

रोज की तरह/डोर-बेल बजाकर
दूध दे जाएगा/दूध वाला

अख़बार वाला डालेगा
हिंदी, अंग्रेज़ी, पंजाबी और उर्दू के
छोटे-बड़े अख़बार/कई घरों में
(बहुत हुआ तो/ किसी अख़बार में
एक छोटी ख़बर/मेरे जाने की होगी)

साथ वाले पार्क में/मेरे जाने से बेख़बर
टहलते होंगे/ कुछ बच्चे, बूढ़े व जवान

एक तरफ़ लॉफ्टर-क्लब वाले/जोर से
रोज की तरह/ कहकहे लगा रहे होंगे

पार्क के बाहर/ मौजूद होगा
नारियल-पानी बेचने वाला भी
मेरे होने/ या नही होने का
उसपर कोई अंतर नही पड़ेगा

हां………अंतर अवश्य पड़ेगा
मेरे अपनों/और मेरी चीज़ों पर
मेरे चश्मे पर/असर पड़ेगा
जिसे नाक पर टिकाए/मैंने
एक पूरी उम्र/ गुज़ार दी
इसे पहनने वाला/अब
कोई भी नही होगा..

घर के हर भाग में फ़ैली/ मेरी प्रिय
किताबों व फाइलों पर असर पड़ेगा
जिनसे/ पत्नी सदैव खीझती रही
और मैं / यत्नपूर्वक सम्भालता रहा

पुराने गानों और गज़लों के
बरसों से संजोए कैसेट्स
जिन्हें देख-सुनकर/मेरे चेहरे पर
चमक लौट-लौटकर आती रही

बहुत थोड़े से/ मेरे नजदीकी मित्र
जिनसे मुझे/भरपूर अपनत्व मिला
मेरी/ हल्की रचनाओं पर भी
जो/ मेरा हौंसला बढ़ाते रहे
इन पर/कुछ तो असर पड़ेगा

जिन्हें ज़हन में रखकर
मैं/ताउम्र लिखता रहा
पता नहीँ/वे कभी जानेंगे भी या नही
हां.. मेरे कर्जदाता-बैंक की
चिन्ताएं/अवश्य बढ़ जाएंगी

और..और..
बाकी बहुत कुछ/वही रहेगा
रोज की तरह….

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