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4 Dec 2016 · 1 min read

इश्क में हमारे

इश्क में हमारे वो मुकाम आ गया
अपना कहा मगर उनका नाम आ गया

पीकर जिसे होश दुनिया की न रहे
जिन्दगी के हाथ में वो जाम आ गया

आँखों ने की खता और लब चुप रहे
बेगुनाह दिल पे फिर इल्जाम आ गया

रूठें तो मनाना,मान जाना रूठकर
दिलकश अदाओं का हुनर तमाम आ गया

दो जिस्म थे जो,एक जान होने लगे
रूह से मिली रूह तो आराम आ गया

हेमा तिवारी भट्ट

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