Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
30 Nov 2016 · 1 min read

मुहब्बत करके वो डरता रहा है

मुहब्बत करके वो डरता रहा है
सनम का नाम ही जपता रहा है

मिली है क्यों जफ़ा इश्क़ में उसे ही
दिया सा रात भर जलता रहा है

बिताई ज़िन्दगी है मुफलिसी में
नमक का हक़ अदा करता रहा है

जुबाँ से निकले न कोई हर्फ उसके
सितम वो हंस के ही सहता रहा है

खुदा के ही दर पर कर ले दुआ हम
कयामत का कब किसे पता रहा है

मिलन की सनम से जो रुत आई है
दिल कँवल का बस धड़कता रहा है
बबीता अग्रवाल कँवल

Loading...