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29 Nov 2016 · 1 min read

रुकती साँसों को ठहरने ना दिया अब तक

रुकती साँसों को ठहरने ना दिया अब तक
क्यूँ मैने खुद को मरने ना दिया अब तक

टूटे हैं तो क्या मगर अभी भी दिल में है
ख्वाबों को दिल ने बिखरने ना दिया अब तक

सीने से पलकों तलक आये कई बार आँसू
कश्ती-ए-आँख से उतरने ना दिया अब तक

दुनियाँ न काट डाले इस ख़ौफ़ से शज़र ने
सूखे पत्तों को भी गिरने ना दिया अब तक

बग़ैर मतलब के तो सलाम भी नहीं करते
इस अदा ने रिश्ता सुधरने ना दिया अब तक

बदल डाले हालात ने इरादे किये हुए
बातों पे अपनी ठहरने ना दिया अब तक

आँधियों के डर से हवाओं को न रोक ‘सरु’
तूने ही गुलशन सँवरने ना दिया अब तक

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