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29 Nov 2016 · 1 min read

बूँद नयन से ढलकी कैसे

बूँद नयन से ढलकी कैसे
ऐसी हालत मन की कैसे

तुझको याद न आई है तो
आई मुझको हिचकी कैसे

सौंप दिया था मैंने सब कुछ
तेरी चाहत भटकी कैसे

इन्तजार यदि नहीं तुझे तो
खुली हुई ये खिड़की कैसे

अगर नहीं थी हसरत कोई
चूड़ी पायल खनकी कैसे

नयनों में तू टहल रही थी
आती मुझको झपकी कैसे

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