न जाने कितने अश्क पिये हैं हँसी ओढ़कर,
न जाने कितने अश्क पिये हैं हँसी ओढ़कर,
जो पास थे वो भी दिल की सिसकियाँ पढ़ न सके।
-महेंद्र ‘मजबूर’©️®️
न जाने कितने अश्क पिये हैं हँसी ओढ़कर,
जो पास थे वो भी दिल की सिसकियाँ पढ़ न सके।
-महेंद्र ‘मजबूर’©️®️