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4 Dec 2025 · 1 min read

न जाने कितने अश्क पिये हैं हँसी ओढ़कर,

न जाने कितने अश्क पिये हैं हँसी ओढ़कर,
जो पास थे वो भी दिल की सिसकियाँ पढ़ न सके।
-महेंद्र ‘मजबूर’©️®️

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