मिलो ऐसे मिले जैसे, कि धरती और अंबर है।
मिलो ऐसे मिले जैसे, कि धरती और अंबर है।
हिलोरें उठ रहीं दिल में, बड़ा दिलकश ये मंज़र है।
चमकती ओस की बूँदें,खनकती भोर की पायल,
प्रणय की धूप ले कर आ ,गया मीठा दिसंबर है।।
✍️डॉ.रागिनी स्वर्णकार शर्मा,इंदौर❤️