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3 Dec 2025 · 1 min read

समस्त विधा में एक रचना

कुछ क्षणिकाएँ : ….

बढ़ जाती है
दिल की जलन
जब ढलने लगती है
साँझ
मानो करते हों नृत्य
यादों के अंगार
सपनों की झील पर
सपनों के लिए
……………….
आदि बिंदु
अंत बिंदु
मध्य रेखा
बिंदु से बिंदु की
जीवन सीमा
…………………..
तृषा को
दे गई
दर्द
तृप्ति को
करते रहे प्रतीक्षा
पुनर्मिलन का
अधराँगन में
विरही अधर
भोर होने तक
………………….
निर्जीव राहें
उदास दुआएँ
गतिहीन हवाएँ
शायद
चल दिया
एक अंत
अनंत की तलाश में

सुशील सरना

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