अपने दुःख में डूब ना जाना
अपने दुःख में डूब ना जाना ।
तैर के हर दुख पार लगाना ।
छायेगा जब जब अंधियारा ।
आशा के तुम दीप जलाना ।
प्रेम विलुप्त जो हुआ जीवन से ।
उसको पुनः तुम वापस लाना।
अपने दुख में डूब ना जाना।
तुमसे ही तो है ये ज़माना ।
हे नारी ! बिल्कुल ना घबराना।
कह दो कि तुम रहीं अबला ना ।
छोड़ दिया तुमने डर जाना ।
सीख गईं आईना दिखाना ।
अपने निर्णय ख़ुद ले पाना ।
सीख लिया है तुमने कमाना ।
अतः अब अपने दुःख में
डूब ना जाना ।
प्रगति दत्त 🙏