लोग
कैसे-कैसे लोगों को
तुमने बनाया है
प्रभु ?
यह दुनिया कभी -कभी
मनुज रूपी हथियारों से भरी
एक कक्ष सी लगती है
जिस पर भी भरोसा करो
जिसके लिए भी
कुछ अच्छा सोचो
वह सिर्फ बुरा ही सोंचता है
औजार का अनुचित उपयोग
प्रतिपल करता है
मानसिक संकुचन
दिनों दिन व्यापक होता जा रहा है
लोग तरह तरह के
स्नेह-नकाब लिए फिरते हैं
चुभते हैं आत्मा को
जलाते हैं हृदय को
टूटता है मन
तुम्हारे संसार से
प्रभु!
कैसे-कैसे लोगों को
बनाया है तुमने?
–अनिल मिश्र