जिन गलियों को छोड़ चुकी हूं
जिन गलियों को छोड़ चुकी हूं
अब वहां जाना नहीं चाहती हूं
सबकुछ फ़िर से दोहराना नहीं चाहती हूं
जो मेरा नहीं है उसे पाना नहीं चाहती हूं
गलती एक बार होती है अनजाने में
अब गलतियां करना नहीं चाहती हूं
जो खो गया है उसे ढूंढना नहीं चाहती हूं
अंधेरे जीवन में अब रौशनी नहीं चाहती हूं
_सौम्या