आँखे खुली है ख़्वाब में डूबा हुआ हूँ मैं
आँखे खुली है ख़्वाब में डूबा हुआ हूँ मैं
यादों के इक सैलाब में डूबा हुआ हूँ मैं
उठतीं हैं मेरे सीने में खामोश सदाएँ
उनके ही इज़्तेराब में डूबा हुआ हूँ मैं
दिल को मिरे भायी न सितारों भरी रातें
जुगनू के आब-ओ-ताब में डूबा हुआ हूँ मैं
दुनियाँ को देखना मेरे मन को नहीं भाता
इक छोटे से हबाब में डूबा हुआ हूँ मैं