Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
3 Dec 2025 · 1 min read

चल रहे राख लेकर

कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर तो माफ़ कर देता है परन्तु कर्म नहीं। अटल सत्य है कि जेसे बछड़ा सौ गायों में अपनी माँ को ढूँढ लेता है उसी प्रकार कर्म भी अपने कर्ता को ढूँढ लेता है।शाश्वत सत्य है कि किसी को रूलाकर आज तक कोई हँस नहीं पाया ।
यही विधि का विधान है, जिसे आज तक कोई समझ नहीं पाया।
🙏🏻🍁🌹राधे-राधे🌹🍁🙏🏻

✍️’प्रतिभा की डायरी से’✍️

#शीर्षक:-चल रहे राख लेकर।

चल रहे सभी, जवानी राख पाप लेकर,
अनुभवी नहीं, भावार्थ भव ताप लेकर ।।1।

विधि-विधान का, हवन प्रतिदिन करते हुए,
चले भारती, सांस्कृतिक संताप लेकर ।।2।

बुढ़ापा भजन, सोचकर जवानी रखते,
कल्पनाशील, चलते चंद्र छाप लेकर ।।3।

विश्वास धरो, श्मशान जाकर जीवनी
कहावत बहुत, चले कुमार्ग पाप लेकर ।।4।

भारती-वीर, छोड़ कब मैदान भागे?
चले सतत ही, देश वंदन जाप लेकर ।।5।

प्रकृति-प्रेम, विविध भाषाओ में मिला,
नहीं खोजना, प्रेम भाजन माप लेकर ।।6।

उदासी देख, चुप्पी का अगणन करना,
रही न जाना, प्रतिभा फूल आप लेकर ।।7।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

Loading...