ख़ामोशियाँ लिखी हैं तुम्हें पुकारने के लिए,
ख़ामोशियाँ लिखी हैं तुम्हें पुकारने के लिए,
साँसों में घुली धुनें हैं तुम्हें समर्पित सदा।
मौन की इस भाषा में तुम भाव पढ़ लेना मेरे,
निशब्द पलों में भी तुमसे संवाद चलता रहा।
-महेंद्र ‘मजबूर’©️®️