*चिड़िया रानी*
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी बना घोंसला
तिनका तिनका वह जोड़ती ।
अंडे देखकर सेती उनको
बच्चों को प्यार से पालती ।
दाना वह चुगकर है लाती ,
बच्चों को प्यार से खिलाती ।
माँ का कर्त्तव्य है निभाती,
आत्मनिर्भर बनना सिखाती ।
जब बच्चे बड़े हो जाते हैं
पर फैलाकर उड़ पाते हैं।
फिर हाथ नहीं वो आते हैं,
दूर कहीं वे उड़ जाते हैं।
फिर वे भी नीड़ बनाते हैं,
जग की रीत दोहराते हैं ।
जब वे अकेले रह जाते हैं ,
फिर दुखी होकर पछताते हैं ।
मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश