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2 Dec 2025 · 2 min read

ज़िंदगी का पेपर सबका अलग होता है

ज़िंदगी बड़ी अजीब है…
यह चुपचाप हमें परीक्षा भी देती है और रिज़ल्ट भी खुद ही सुना देती है।
पर सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका पेपर किसी का भी दूसरे से मिलता-जुलता नहीं होता।
मैंने फौज में रहते हुए यह बात सबसे ज़्यादा महसूस की है।

सीमा पर खड़े दो सैनिक भी
एक जैसी वर्दी पहनते हैं,
लेकिन उनके दिलों में चल रही लड़ाई अलग होती है—
किसी को घर की चिंता खाती है,
किसी को साथी की शहादत रुला देती है,
और किसी को इस डर की टीस कि कहीं मोर्चा टूट न जाए।
फिर भी हर कोई अपनी ड्यूटी निभाता है…
और यहीं से असली जीवन का पाठ शुरू होता है।

मैंने अपने जीवन में एक बात बहुत साफ़ देखी है—
जब इंसान दूसरों की राह देखकर चलता है,
वह धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देता है।
फिर चाहे वह नौकरी हो, रिश्ते हों, सपने हों या संघर्ष—
दूसरों की कॉपी बनकर इंसान कुछ दूरी तो तय कर लेता है,
पर एक दिन एहसास होता है कि वह रास्ता
उसकी मंज़िल का था ही नहीं।

फौज में हम सीखते हैं कि
हर जवान का मिशन अलग होता है,
हर पोस्ट का खतरा अलग होता है,
हर रात की ठंड, हर पहाड़ी का अकेलापन अलग होता है।
फिर भी हम एक-सा बनने की कोशिश नहीं करते,
क्योंकि हमें पता होता है कि
नकल करने वाला कभी मोर्चा नहीं जीतता—
जीत हमेशा वही पाता है,
जो अपने कंधों पर अपनी ज़िम्मेदारी उठाता है।

ज़िंदगी का सौंदर्य भी ऐसा ही है—
हर किसी की कहानी अलग है,
हर किसी का दुख अलग है,
हर किसी की लड़ाई अलग है,
और हर किसी की जीत भी अलग ही चमकती है।

हम अक्सर भूल जाते हैं कि
दूसरों जैसा बनने की कोशिश में
हम खुद जैसा बनने का मौका गंवा देते हैं।

किसी की सफलता देखकर खुद को कम महसूस करना
उतना ही गलत है,
जितना दूसरों के बूट पहनकर
उनकी पोस्ट पर ड्यूटी देने जाना—
रैंक दिख सकती है, पर अंदर का हौसला नहीं।

ज़िंदगी हमसे सिर्फ एक चीज़ मांगती है—
ईमानदारी से अपनी राह चलने का साहस।
मैंने अपने 16 साल के फौजी जीवन में देखा है—
जो जवान अपना डर खुद जीत लेता है,
वह दुश्मन को भी जीत लेता है।
उसके आगे भीड़ नहीं चलती,
उसके आगे उसकी खुद की रोशनी चलती है।

इसलिए…
अगर आज तुम्हें लगता है कि तुम पीछे छूट रहे हो,
तो याद रखना—
तुम किसी की दौड़ में नहीं हो।
तुम्हारी मंज़िल वही है
जिसकी ओर तुम खुद कदम बढ़ाते हो,
न कि वह जहां भीड़ बढ़ती है।

अपने सफ़र पर भरोसा रखो,
अपने अलग पेपर को स्वीकार करो,
और अपनी कहानी को उसी तरह लिखो
जैसे दिल लिखना चाहता है—
बिना किसी की नकल, बिना किसी के डर के।
क्योंकि असली जीत वही है
जहां इंसान खुद को पा लेता है।

– कृष्ण सिंह

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