सच कहूं तो दिल दुखता है
सच को जब हारते देखा
इधर उधर भागते देखा
झूठे को मुस्कुराता देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था
जब ईमानदारी को हारते देखा
बेईमानों को जीतता देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था
जब खाने के ढेरों को
जब नालों में बहते देखा
इसके लिए जब लोगों को
तड़प तड़प के मरते देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था…
जब दूध से कुपोषणित पथ पे
मैंने कुछ बच्चों को देखा
और जब दूध की नदियों को
जब नालों में बहते देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था
जब खुदा को घर से निकालते देखा
बाहर लोगों को खुदा खुदा करते देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था
सच को जब हारते देखा
इधर उधर भागते देखा
झूठे को उस पे हंसते देखा
सच कहूं तब दिल दुखा था….