1222 1222 1222 1222
पड़ेगा कोहरा अब हंसी मंजर का इशारा है ,
की सर्दी आ रही है यह दिसंबर का इशारा है।
रहा मैं भी कभी ऊंचे पहाड़ों का बड़ा हिस्सा
हुआ हूं आज टुकड़ा टुकड़ा कंकर का इशारा है।
जिसे जो जी में आता है चला जाता सुना करके
मैं अपने धुन में रहता हूं समंदर का इशारा है
सफाया कर ले जी भर के तू जंगल का ऐ इंसानों
तुझे मैं घेर लूंगा आज बंजर का इशारा है।
कभी पीछे नहीं हटते किसी की बदजुबानी से ,
दिलों पर राज करते हैं मुनव्वर का इशारा है।
नूर फातिमा खातून नूरी
जिला -कुशीनगर