जागरूक बनो
अभियान यही चलाना है,
जागरूक होकर इंसानियत को निभाना है।
एड्स एक महामारी सही,
पर छूत की बीमारी नहीं-यही समझाना है।
हर भेद को अपने मन से मिटाकर,
सेवा को ज़हन में बसाना है।
दूसरे के दर्द को अपनी ज़िम्मेदारी मान,
अपने सुख की छाँव से उन्हें मरहम लगाना है।
फ़रिश्ता न सही इंसान बनकर,
जीवन को सही राह ले जाना है।
वन्दना सूद