ग़ज़ल
यादें जब तेरी जाती नहीं
रात में नींद आती नहीं
ये परिंदे कहां उड़ गये
बुलबुलें अब तो गाती नहीं
हाय बैरन हुई है हवा
अब खबर उनकी लाती नहीं
ज़ह्र आलूद है जब हवा
तब से तितली भी आती नहीं
बोझ घर का है अब मेरे सर
ज़िन्दगी मुस्कुराती नहीं
©️Suraj Tiwari