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2 Dec 2025 · 1 min read

कविता

अश्वगति छंद
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कौन कहे कविता अति सुन्दर भाव भरी।
हो लयबद्ध सदा निखरी ठहराव भरी।
मोह लिया करती सबके मन स्नेह लिए।
वाह कहे सहसा जिसने रसपान किए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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