पूर्णता का बोध प्रभु आप के चरण से हो
पूर्णता का बोध प्रभु आप के चरण से हो
और मुखारविंद से प्रसन्नता सनी रहे।
धर्म युद्ध के निमित्त आपने बुलाया यदि
क्यों संकोच जीत तक ऊर्जा बनी रहे।
चाहता हूं भक्ति भाव के स्वच्छंद सागरों में
मन हो विशिष्ट ज्योति ज्ञान की जली रहे।
ऐसी कृपा दृष्टि की जरूरत है कृष्ण मेरे
जिससे प्रशस्ति धर्म पंथ पे बनी रहे।
____ कवि दीपक झा “रुद्रा”