Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
1 Dec 2025 · 1 min read

दिसंबर का वादा

सर्द हवा रात भर फुसफुसाती रहती है,
खिड़कियों से झाँककर पूछती है—
किसे खोजती है ये आँखें?
शहर की सड़कों पर बर्फ जैसा सन्नाटा है,
पेड़ों पर ठहरी धुंध
मानो किसी याद की चादर ओढ़े सोई हो।
दिसंबर फिर वही कहानी लेकर आया,
ठिठुरे मौसम, धुंधले आसमां,
और तन्हाइयों का अनकहा बोझ…
लौट आई हर बात, हर धड़कन,
बस वो कदम नहीं लौटे
जो कभी मेरे दरवाज़े तक आया करते थे।
कभी-कभी मौसम भी धोखा दे देता है—
गुज़रे वक्त की खुशबू लाकर,
और दहलीज़ पर छोड़ जाता है इंतज़ार…
दिसंबर ने सब तो दे दिया—
ठंड, यादें, ख़ामोश धड़कनें,
सिर्फ़ वही नहीं,
जिसके बिना ये मौसम आधा लगता है।

-महेंद्र ‘मजबूर’©️®️

Loading...